आए दिन भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। शेयर बाजार में हर रोज बहुत सारे शब्दों का प्रयोग होता है। कई ऐसे भी लोग होते हैं, जो शेयर बाजार के इन शब्दों के मतलब नहीं जानते हैं। आइए जानते हैं कुछ ऐसे शब्दों के बारे में जो शेयर बाजार से जुड़े हैं-

फंडामेंटल एनालिसिस

फंडामेंटल एनालिसिस लंबी अवधि के निवेश के लिए शेयर चयन का एक लोकप्रिय तरीका है। बुनियादी विश्लेषण में किसी कंपनी की बैलेंस शीट, आमदनी, नकदी के प्रवाह आदि के आधार पर उसका वास्तविक मूल्य आंकने का प्रयास किया जाता है। यदि उसका शेयर बाजार में भाव उसके वास्तविक मूल्य से कम हो तो उसे खरीदना फायदेमंद माना जाता है, क्योंकि उसका भाव बढ़ने की उम्मीद अधिक होती है।

टेक्निकल एनालिसिस

टेक्निकल एनालिसिस भी निवेश के लिए शेयर चुनने का महत्वपूर्ण तरीका है। तकनीकी विश्लेषण यह मान कर चलता है कि किसी शेयर से संबंधित सभी बातें उसके बाजार भाव में ही शामिल होती हैं। इसमें किसी शेयर की पिछले कारोबारी दिनों की कीमतों और कारोबारी वॉल्युम के आधार पर उसमें निवेश का फैसला किया जाता है। यह निर्णय करने के लिए तकनीकी विश्लेषक उस शेयर के दैनिक, साप्ताहिक, मासिक और सालाना चार्ट का अध्ययन करते हैं।

स्टॉप लॉस

स्टॉप लॉस वह बिंदु या मूल्य होता है, जिस पर शेयर कारोबारी अपने शेयर को बेच देते हैं और उसके बाद होने वाले नुकसान से बच जाते हैं। दूसरे शब्दों में, किसी शेयर का स्टॉप लॉस वह मूल्य है, जिसके बाद आपको कोई नुकसान नहीं होता है और जिस बिंदु पर आप किसी शेयर के संबंध में होने वाले संभावित नुकसान की सीमा तय कर लेते हैं, जिससे आपका नुकसान कम हो जाता है।

कैसे काम करता है

स्टॉप लॉस की सीमा को शेयरधारक तय करता है। उदाहरण के लिए मान लीजिए अगर आपने कोई शेयर 100 रुपए में खरीदा है, लेकिन आपको लगता है कि इसमें गिरावट आ सकती है तो आप अपने ब्रोकर को कह देंगे कि अगर इस शेयर के दाम 95 रुपए के स्तर पर आ जाए तो वह शेयर को बेच दे। इस तरह से इस शेयर के मामले में आपका स्टॉप लॉस 95 रुपए हो गया। अगर इसके बाद भी शेयर गिरता है तो उससे आपको कोई नुकसान नहीं होगा, क्योंकि आप उसे 95 रुपए के स्तर पर ही बेच चुके होंगे।

केवल गिरावट के समय ही नहीं, बल्कि यह तब भी काम करता है जब शेयर के भाव बढ़ रहे हों। उदाहरण के लिए अगर आप 100 रुपए की कीमत पर खरीदे गए उसी शेयर के बारे में अपने ब्रोकर से कहें कि जब यह शेयर 115 रुपए पर पहुंच जाए तो उसे बेच दिया जाए।

 सर्किट

सर्किट दो प्रकार का होता है- लोअर सर्किट और अपर सर्किट। भारत में हाल ही में शेयर मार्केट में सर्किट लगाया गया था। पिछले लोकसभा के चुनाव के बाद अपर सर्किट लगाया गया था। बाजार में तेजी दर्ज करने पर अपर सर्किट और गिरावट दर्ज करने के बाद लोअर सर्किट लगाया गया था। शेयर बाजार में शेयरों की खरीद-फरोख्त के दौरान किसी भयावह स्थिति के उत्पन्न हो जाने पर नियंत्रण पाने के लिए सर्किट लगाया जाता है और इस स्थिति को सर्किट ब्रेकर कहा जाता है।

इस स्थिति के लिए कई बार कॉलर शब्द को भी इस्तेमाल में लाया जाता है। सूचकांक में एक निश्चित फीसदी तक गिरावट दर्ज करने के बाद एक्सचेंज अपनी ट्रेडिंग को सक्रिय करने के लिए इस तरह की रोक लगाता है। उदाहरण के तौर पर डाउ जोन्स के औद्योगिक औसत में 10 फीसदी की गिरावट के बाद एनवाईएसई में एक घंटे के लिए शेयर की खरीद-फरोख्त पर प्रतिबंध लगा दिया जा सकता है। कुछ दूसरे सर्किट ब्रेकर में 20 फीसदी और 30 फीसदी की गिरावट दर्ज किए जाने पर सर्किट लगाया जाता है।

स्टॉक ट्रेडर

स्टॉक ट्रेडर शब्दावली का इस्तेमाल फाइनेंशियल मार्केट में निवेशकों के लिए किया जाता है। शेयर या प्रतिभूति की ट्रेडिंग करने वाले इस काम को अंशकालिक या पूर्णकालिक पेशे के तौर पर अपनाते हैं। अक्सर, ऐसे ट्रेडर हेज फंड, म्यूचुअल फंड, पोर्टफोलियो मैनेजर या पेंशन फंड के जरिए किसी भी संगठन में काम करते हैं। स्टॉक की ट्रेडिंग करने वाले केवल शेयरों तक ही अपने को सीमित नहीं रखते हैं, बल्कि वह दूसरे फाइनेंशियल इंस्ट्रुमेंट में भी निवेश कर सकते हैं।

सफल स्टॉक ट्रेडर बनने के क्रम में निवेशकों को मुनाफा हासिल करने की नीति अपनानी पड़ती है। उदाहरण के तौर पर कुछ स्टॉक ट्रेडर छोटी अवधि वाले शेयरों में निवेश करते हैं, जिन शेयरों से पैसे कमाए जा सकते हैं, जबकि कुछ लंबी अवधि वाले शेयरों में निवेश करना चाहते हैं। शेयर में निवेश की नीति स्टॉक ट्रेडर की व्यक्तिगत तौर पर होती है। यह सब कुछ अनुमान के आधार पर चलता है। स्टॉक ट्रेडिंग के क्षेत्र में वारेन बफेट, बेंजामिन ग्राहम, आइजेक न्यूटन और जॉर्ज सोरोस जैसे नाम कुछ बड़े खिलाडिय़ों के तौर पर लिए जाते हैं।

स्टॉक ऑप्शन

स्टॉक ऑप्शन के तहत एक पार्टी, दूसरी पार्टी को अपनी सुविधा के हिसाब से शेयर बेचने की सुविधा देती है। यह शेयर के ऑप्शन खरीदने वाले के पास पूरा अधिकार होता है कि वह उसकी खरीदारी करे या नहीं करे। आप स्टॉक ऑप्शन के तहत कभी भी शेयर बचने या खरीदने के लिए बाध्य नहीं किए जा सकते हैं।

इसका मतलब यह हुआ कि किसी खास अवधि या किसी खास तारीख को आप समझौता करके किसी से शेयर खरीद या बेच नहीं सकते हैं। इंग्लैंड में स्टॉक आप्शन की जगह शेयर ऑप्शन शब्द का इस्तेमाल होता है। अमेरिकी ऑप्शन की खरीद बिक्री, स्टॉक की खरीद और उसके खत्म होने की तारीख के बीच कभी भी कर सकते हैं।

 पुट ऑप्शन

पुट ऑप्शन ऐसा ऑप्शन होता है जो खरीदार या धारक को उसके सारे शेयरों को एक निर्धारित कीमत पर या फिर एक निश्चित तारीख के पहले बेचने का अधिकार देता है। विक्रेता या राइटर के लिए इसे खरीदना बाध्यकारी होता है। हर पुट ऑप्शन की एक एक्सरसाइज प्राइस होती है। यह वह प्राइस होती है जिस पर धारक ऑप्शन राइटर को शेयर बेचता है। अगर शेयर के दाम एक्सरसाइज प्राइस के नीचे होता है तो कॉल देने वालों को लाभ होता है। इस ऑप्शन को इन द मनी भी कहते हैं। इसका एक खास मूल्य भी होता है। यह एक्सरसाइज मूल्य और कॉल प्राइस का अंतर होता है।

कॉल ऑप्शन

कॉल ऑप्शन भी दो पक्षों के बीच एक तरह का अनुबंध है। इसके तहत किसी निर्धारित कीमत पर एक निर्धारित समय शेयर खरीदने का अधिकार दिया जाता है। हालांकि, यह बाध्यकारी नहीं होता। इसमें विक्रेता शेयर बेचने को बाध्य होता है अगर खरीददार चाहे तो। इसके लिए खरीददार एक प्रीमियम अदा करता है। कॉल ऑप्शन उस समय फायदेमंद होता है, जब शेयरों के दाम चढ़ रहे होते हैं।

जानिए क्या होता है वायदा कारोबार?

इस कारोबार का एक फायदा यह भी है कि व्यक्ति अपनी आगे की जरुरतों को ध्यान में रखकर वस्तु बुक करा सकता है और इसमें पूरा पैसा भी एक साथ नहीं दिया जाता है, लेकिन कॉन्ट्रेक्ट की तारीख आने तक आपको अपना सौदा क्लीयर करना होता है।

भारत में कई एक्सचेंज हैं जिनमें वायदा कारोबार होता है, जिसमें एमसीएक्स, एनसीडीएक्स, एनएमसीई और आरसीएक्स प्रमुख हैं इनमें कमोडिटी वायदा कारोबार होता है, जबकि शेयरों का वायदा कारोबार बीएसई और एनएसई पर होता है। आपको बता दें कि वायदा कारोबार में हर रोज हजारों करोड़ का व्यापार होता है।

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